वो पल फ़िर से चाहता हूँ (woh pal fir se chahta hun)


वो पल फ़िर से चाहता हूँ  (woh pal fir se chahta hun)


बिखरने लगा हूँ फ़िर से संभलना चाहता हूँ ,
जिंदगी के कुछ पल फ़िर से जीना चाहता हूँ |


वो सभी सुकूं के पल मै फ़िर से चाहता हूँ ,
ए यार तेरी जिंदगी के कुछ हसीं पल मै फ़िर से चाहता हूँ |


वो सब तेरी बातें तुझसे किए वादे मै फ़िर से चाहता हूँ
चाहे सब झूठे ही सही मगर आज उन्हें फिर भी चाहता हूँ |


वो तेरा प्यार तेरा एतवार झूठा या सच्चा ही सही फ़िर से चाहता हूँ,
कुछ ख़ुशी के पल जिंदगी के मै फ़िर से चाहता हूँ |


बिखरने लगा  हूँ फ़िर से संभलना चाहता हूँ,
जिंदगी के कुछ पल फ़िर से जीना चाहता हूँ |


हितेश

Comments

  1. Really heart touching. Thank you sir

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