समय की तकरार (samay ki takraar)



समय की तकरार (samay ki takraar)


समय की तकरार तो देखो, 
जनाब अब ख़ुद से जीना सीख रहे है।।

जिन्हें निगाहों से हमने पीना सिखाया,
वो आज मयख़ाने जाके पी रहेे है,
देखो जनाब अब ख़ुद से पीना सीख रहे है।

जिन्हें क़दम-क़दम चलना सिखाया,
वो आज अकेले ही चल रहे है,
देखो वो जनाब आज ख़ुद से चलना सीख रहे है।

जिन्हें मुद्दतो से प्यार करना सिखाया,
आज वो ही नफ़रत कर रहे है,
देखो वो जनाब खुद से नफ़रत करना सीख रहे है।

जिन्हें उम्मीदों में जीना सिखाया हमने,
वो आज हमें ना उम्मीद किये जा रहे है,
देखो जनाब आज खुद ही नाउम्मीद  हुए जा रहे है।

जिन्हें जिंदगी की हर मुश्किल से लड़ना सिखाया,
वो ज़िंदगी की जंग में हारे जा रहे है,
देखो जनाब आज  ख़ुद की ज़िंदगी से हारे जा रहे है।

जिन्हें हरदम साथ देना सिखाया हमने,
वो हमें तन्हा किये जा रहे है ,
देखो जनाब आज ख़ुद ही साथ छोड़ना सीख रहे है।

जिन्हें हर किसी से निडर रहना सिखाया,
वो आज जिंदगी से डरे जा रहे है,
देखो जनाब आज ख़ुद ही डरना सीख रहे है।

समय की तकरार तो देखो,
जनाब अब ख़ुद ही जिना सीख रहे है।।

✍️तेश 

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