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Showing posts from 2020

कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani)

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कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani) मुझे क्या चाहिए ?  क्या दोगे तुम? क्या दे सकते हो ? छोड़ो! तुम क्या दोगे ? मैं मांग भी किससे रहा हूँ? वैसे मैंनेे तो तुमसे कभी कुछ नही मांगा, आज मांग रहा हूँ, क्या मेरी बात मानोगे? क्या मुझे नही जलाओगे?  क्या मुझे बेवज़ह नही मारोगे? क्या मेरे छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करोगे? मेरी जरूरत तो हमेशा ही तुझे ही पड़ती है, कभी तुझे फ़ल चाहिए, कभी फूल, कभी पत्ते और कभी लकड़ी सब मुझ से ही मिलता है तुझे, इतना तो मैं देता हूँ, सबसे बड़ी चीज़ जो तुझे जो ज़िंदा रखती है हवा में भी मैं ही तुझे देता हूँ। क्या कभी सोचा है मुझे काटने से या मरे फ़ल -फूल तोड़ने से पहले , की मेरी कितनी वर्षों की मेहनत है, जिसे चंद मिनटों में तुम बर्बाद कर देते हो। मुझे क्या बर्बाद करोगे जब अहसास होगा तुझे तो पता चलेगा, की कौन बर्बाद हो गया । सही कहते है ना मुफ़्त की चीज़ों की कोई कीमत नही होती। तभी मेरी भी कोई कीमत नही है। इतना मुफ्त में देने के बाद भी फिर भी चैन नही तुझे, अरे ! तुझे तो ज़रूरत पड़ती ही रहती है ना आगे भी पड़ेगी, तो ऐसा कर ना म...

एक यार है मेरा (ek yaar hai mera)

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एक यार है मेरा (ek yaar hai mera) अंधेरे में एक चिराग़ सा, चेहरे में आफ़ताब सा, एक यार है मेरा । गुलशन में बहार सा, फ़ूलो में महक सा , एक यार है मेरा। थोड़ा सा मासूम सा, थोड़ा सा शरारती सा, एक यार है मेरा। जो हर एक पल को जीता सा, हर किसी को जीना सिखाता सा , एक यार है मेरा। हर किसी का वो अपना सा, हर किसी के दर्द में दवा सा, एक यार है मेरा। दर्द में हमसफ़र सा, ज़ख्म में मरहम सा, एक यार है मेरा। बेगानों में अपना सा, जिससे रिस्ता एक गहरा सा, एक यार है मेरा। पूर्णिमा के चाँद सा, अमावस में दिए सा, एक यार है मेरा। पतझड़ में बहार सा, बसंत में बहार सा, एक यार है मेरा। ना उम्मीदी में उम्मीद सा, काली रात में जुगनू सा, एक यार है मेरा। प्यार के जज्बात सा, इश्क़ के एहसास सा, एक यार है मेरा। सर्दियों की धूप सा, गर्मी में छाँव सा, एक यार है मेरा। मंदिर की पूजा  सा, मस्जिद की इबादत सा, एक यार है मेरा। कुछ मेरा सा, कुछ अपने सा, एक यार है मेरा ।। ************* हितेश *************

जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq)

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जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq) बेनाम मोहब्बत का जाम पीना अभी बाकी है, उस शख़्स को सीने से लगाना अभी बाकी है । दर -बदर भटकते रहे जिसके लिए हम, उसको क़रीब से निहारना अभी बाकी है । प्यार का अंदाज़ क्या होता है, उस शख़्स से सीखना अभी बाकी है। कोई नही है हम दोनों के दरमियां, उसको अभी ये बताना बाकी है । रातों को दिन कर दिया जिसने मेरी, उसके साथ एक शाम गुजारना बाकी है । तड़पता है दिल जिसके लिए हर दफ़ा, उसको सीने से लगाना अभी बाकी है । जिन लबों से सुने थे किस्से मोहब्बत के , उन लबों को छूना अभी बाकी है  मुद्दतों से चाह जिसको पा लेने की थी, उस शख़्स को पाना अभी बाकी है, कदम-कदम चलना सिखाया जिसने हमे, उसके साथ ज़िन्दगी का सफर तय करना अभी बाकी है। हर पल हँसना सिखाया जिसने हमे, उसके गले लिपटकर रोना अभी बाकी है, हर पल ज़िन्दगी जीना सिखाया जिसने हमें, उसके साथ मरना अभी बाकी है| ************************************* ************************************* for more visit on:-

ये दौर भी देख लिया (ye daur bhi dekh liya)

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ये दौर भी देख लिया (ye daur bhi dekh liya) कभी लिखते थे उनके लिए बहुत कुछ, अब उसके लिए कुछ लिखा नही जाता | (Kabhi likhte the unke liye bahut kuchh, Ab uske liye kuchh likha nahi jata.) रहते थे ख्यालो में जिनके हर पल अब उसके लिए कुछ सोचा भी नही जाता, (Rahte the khayalon me jinke liye har pal, Ab unke liye kuch socha bhi nahi jaata.) हर रुसवाई में रोते थे जिसकी, अब उसके बिना रोना भी नही आता | (Har ruswaai me rote the jiski, Ab uske bina rona bhi nahi aata.) करते थे प्यार जिसे बेशुमार, अब उसके लिए प्यार भी नही आता।। (Karte the pyar jise beshumar, Ab unke liye pyaar bhi nahi aata.) जिन्होंने दिखाए थे ख़्वाब ज़िन्दगी के, अब वो ख़्वावो में तक नही आता। (Jinhone dikhaye the khwab saath jeene ke, Ab wo khwabo me tak nahi aata) जिंन्होने खाई थी कसमे साथ जीने मरने की, अब उनका साथ भी रास नही आता | (Jinhone khayi thi kasme saath jeene marne ki, Ab unko hamara sath tk raas nahi aata.) ज़िन्दगी कुछ नज़र नही आती थी जिनके बग़ैर, अब उनके ...

मेरी यार है वो (meri yaar hai woh)

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मेरी यार है वो (meri yaar hai woh) एक मासूम सी प्यारी सी, इस दुनिया से अंजान सी, एक खूबसूरत परी है वो | जरा सा पागल जरा सी मासूम, मुझमे मेरी तरह बसी है वो, बात बात में हर पल रूठती, बेवजह हर पल मुझसे झगड़ती है वो, ये पता है मैं उसे कभी नहीं मनाऊंगा, ख़ुद-ब-ख़ुद ही मान जाती है वो, बातों में जिसके हर पल शरारतें, थोड़ी नटखट सी थोड़ी पागल सी है वो, कितनी भी दूर हो मुझसे वो, फ़िर भी हर पल पास ही रहती है मेरे वो, कुछ जिद्दी सी कुछ बेफ़िक्र सी, एक आज़ाद चिड़िया सी है वो, रिश्ता जिससे बेवजह सा बेनाम सा, फिर भी मेरे दिल में बसती है वो, बेरंग सी दुनिया में हर रोज़ नए रंग भरती, इस अँधेरी दुनिया में एक किरण सी है वो, हर रोज़ एक नयी उड़ान भरती है वो, इस दुनिया में आज़ाद पंछी है वो, हजारों में नहीं लाखों में, एक प्यारी सी एक मासूम सी मेरी यार है वो| ✍️तेश

एक जहान मेरा भी (ek jahan mera bhi)

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एक रफ़ीक है मेरा भी, जो हर पल मेरे दरमियां रहता है एक चिराग़ है मेरा भी , जो हर पल मेरे लिए जलता है एक मुख़तार है मेरा भी, जो मेरे दिल के मामलों को देख लिया करता है एक महताब है मेरा भी, जो हमेशा सिर्फ मेरे लिए चमकता है  एक रहबर है मेरा भी, जो हर पल मुझे बाट दिखाता है, एक मांझी है मेरा भी, जो हर पल मेरी नैय्या खेता है  एक अजीज़ है मेरा भी, जो हर पल मेरी बाट जोहता है कोई अपना है मेरा भी, जो हर पल मेरे लिये इबादत करता है एक दिल है मेरे लिए भी, जो हर पल मेरे लिए धड़कता है एक समुन्दर है मेरे लिए भी, जो बस मेरे लिए ठहरा है एक हमसफ़र है मेरा भी, जो दिलों जान से मुझे चाहता हैं, एक जहां है मेरा भी, जो मेरे इशारे में चलता हैं ✍️ तेश शब्दार्थ रफ़ीक - साथी दरमियां - साथ, चारों ओर चिराग़ - दिया मुख़तार - वकील महताब - चाँद रहबर - मार्गदर्शक माँझी - केवट , नव्वा अजीज़ - प्रिय, अपना बाट - रास्ता इबादत - प्रार्थना , पूजा

ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम (khuhd muskurane use chhor aaye ham)

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ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम (khuhd muskurane use chhor aaye ham) दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम || बहुत हुआ अब ये सिलसिला दर्द का, मुस्कुराने के बहाने आंखिरी बार रो आए हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम, दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम || छोड़ा नहीं था शायद कभी मैंने दर्द का साथ, तभी मुस्कुरा ना पाए थे कभी हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम, दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम || वो जन्म-जन्मों के वादों को छोड़ आए, सारे ग़मों के नातों को पीछे छोड़ आए हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम, दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम || सिलसिला आज वो ग़म-ए-जिंदगी का ठुकरा आए, मौत से ख़ुद का सौदा करने निकल आए हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम, दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम || वो चेहरे, वो ज़ज्बात, वो बातें सब पीछे छोड़ आए, नई जिंदगी जीने का हुनर सीख आए हम, आज ख़ुद मुस्कुराने उसे छोड़ आए हम, दर्द की आँखों में यूँ धूल झोंक आए हम || हितेश

समय की तकरार (samay ki takraar)

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समय की तकरार (samay ki takraar) समय की तकरार तो देखो,  जनाब अब ख़ुद से जीना सीख रहे है।। जिन्हें निगाहों से हमने पीना सिखाया, वो आज मयख़ाने जाके पी रहेे है, देखो जनाब अब ख़ुद से पीना सीख रहे है। जिन्हें क़दम-क़दम चलना सिखाया, वो आज अकेले ही चल रहे है, देखो वो जनाब आज ख़ुद से चलना सीख रहे है। जिन्हें मुद्दतो से प्यार करना सिखाया, आज वो ही नफ़रत कर रहे है, देखो वो जनाब खुद से नफ़रत करना सीख रहे है। जिन्हें उम्मीदों में जीना सिखाया हमने, वो आज हमें ना उम्मीद किये जा रहे है, देखो जनाब आज खुद ही नाउम्मीद  हुए जा रहे है। जिन्हें जिंदगी की हर मुश्किल से लड़ना सिखाया, वो ज़िंदगी की जंग में हारे जा रहे है, देखो जनाब आज  ख़ुद की ज़िंदगी से हारे जा रहे है। जिन्हें हरदम साथ देना सिखाया हमने, वो हमें तन्हा किये जा रहे है , देखो जनाब आज ख़ुद ही साथ छोड़ना सीख रहे है। जिन्हें हर किसी से निडर रहना सिखाया, वो आज जिंदगी से डरे जा रहे है, देखो जनाब आज ख़ुद ही डरना सीख रहे है। समय की तकरार तो देखो, जनाब अब ख़ुद ही जिना सीख रहे है।। ✍️...

ख़ुद से गुफ़्तगू (khud se guftagu)

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ख़ुद से गुफ़्तगू (Khud se guftagu) आज बड़े लंबे अरसे बाद ख़ुद से गुफ़्तगू करने जी जुर्रत की, काफ़ी वक्त गुजर गया था शायद ,मुझे तो अच्छे से याद भी नहीं आंखरी बार ख़ुद से बातें ना जाने कब की थी , सोचा ख़ुद के हाल जान ले, खुद के हाल जानने की जहमत की तो , "वह बड़ा ही परेशान सा था, वो मुझसे बहुत नाराज था, जब वजह का पता लगाया तो पता चला कि वाकई में वजह हैरान कर देने वाली थी। शिकायत यह थी कि ख़ुद को खुद से बात करने का वक़्त नही था। वाकई में बहुत दिनों बाद बात करने के लिए वक़्त निकाला था । हाल लेने की कोशिश की तो वह दुनिया की इस भीड़ में वो बहुत अकेला नज़र आ रहा था यहाँ  तक कि वह ख़ुद से भी दूर हो गया था, मानो भीड़ से डर कर कही किसी कोने में दुबक के बैठा हो। शायद उसने अकेले रहने की आदत सी डाल ली थी , वरन कभी ऐसे भी दिन थे कि उसे अकेले से घुटन सी होती थी, पर आज वह उसी एकांतपन को अपनी जिंदगी बना लिया था। आह मुझे भी अहसास होने लगा कि वाकई में वक़्त और हालात के साथ हर कोई बदल जाता हैं ,और बेवज़ह लोगो को दोष दिया करते है । मैंने उसे मनाने की बहुत सी कोशिश की पर आज उसने मुझे मुड कर तक नही देखा , मेरी ...

तमन्ना इश्क़ की (tamanna ishq ki)

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तमन्ना इश्क़ की (Tamanna Ishq Ki) तमन्नाओं के सिलसिले यूँ ही नहीं है, वो हर रोज एक नयी प्यास लगाये जा रही है | एक मीठी तलब सी है उनकी ख़ुशबू में, जो हमें हर रोज उनकी बज़्म में खींचे जा रही है | एक उम्मीद सी है उनकी बातों में, जो हर रोज मुझे उनके करीब लाये जा रही है | एक ख़ुशी सी है उनके गुलशन में जो उल्फ़त में हर रोज बहार लाये जा रही है | बहुत कुछ बोलती है उनकी खामोश नजरें, वो इतना सुकून ना जाने कहाँ से लाये जा रही है | कुछ तो राज है उनकी कहानी में भी, जो हमें अपनी निगाहों से वो रोज पिलाये जा रही है | यूँ ही मुस्कराहट नहीं है उनके चेहरे पर भी, उसकी मुस्कराहट उसके कुछ राज छुपाये जा रही है | ✍️तेश

अजीब हालात (ajeeb halaat)

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अजीब हालात (ajeeb halaat) अजीब से जज्बात है, अजीब से हालात है, इस बेदर्दी दुनिया के बडे अजीब से खयालात है | ना कही कोई  इंसान, ना ही कही उनकी इंसानियत नज़र आती है | ना ही किसी के कुछ ज़ज्बात नज़र आते है  अजीब से शौक रखने लगे अब लोग, हर कोई बर्बादी के कग़ार पर नज़र आते है | यहाँ हर किसी मोड़ पर ये सब बिकते नज़र आते है | ना ख़ुदा की परवाह, ना भगवान का खौफ़, हर जगह नकाबों में लोग नज़र आते है | हितेश 

दुआएं और बद्दुआएं (duaayen aur badduaaye)

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दुआएं और बद्दुआएं (duaayen aur badduaaye) किसी की दुआएं तो, किसी की बद्दुआएं काम कर रही थी, कोई करता था प्यार तो, किसी की नफ़रतें मेरे लिए बेशुमार थी | किसी की थी कोशिश हमें भुला देने की तो, किसी की हसरत थी हमें पा लेने की | किसी की नफ़रतें भी मुक़म्मल थी, तो किसी का प्यार भी बेअसर था | कभी किसी की नफ़रतें  हावी होती, तो हम पे कभी किसी का प्यार | कहते है दुआओं में बहुत असर होता है, पर उनकी बद्दुआएं भी आज असरदार थी | ना हो सकी हसरत किसी की भी पूरी, ना भुला सके वो  हमें, और ना पा सका कोई मुझे | हितेश 

बस यूँ ही .....

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किस्से कहानियां बहुत सुन लिए मोहब्बत के  अब ख़ुद मोहब्बत करेंगे हम | इश्क़ रास आये चाहे न आये पर इश्क़ करने का गुनाह करेंगे हम | वो आये या न आये मेरी महफ़िल में, फ़िर भी उनका हर पल इंतजार करेंगे हम | कभी हूक सी उठेगी दिल मे तो, उसकी यादों को सीने से लगाएंगे हम | बस यूँही उसके लिए कुछ भी करेंगे हम || वो हमें कभी चाहें या न चाहें,  फ़िर भी उसे हर पल चाहेंगे हम | कभी वो मेरा साथ दे या न दे , पर हर पल उसका साथ देंगे हम | नशा करते तो नही पर उसकी आँखों से पियेंगे हम, सारा  दिन सारी रात उसी नशे में चूर रहेंगे हम |   कभी तन्हा वो हो तो, वही अपनी महफ़िल बसा लेंगे हम | बस यूँही उसके लिए कुछ भी कर गुजरेंगे हम || हितेश

अभी बाक़ी है (abhi baaki hai)

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अभी बाक़ी है (abhi baaki hai) तेरी दीदार की हसरत अभी बाक़ी  है, तुझे पाने की ख्व़ाहिश अभी बाक़ी  है | सोचा तेरी चाहतें भुला दूँ , पर तेरे लिए मेरी चाहत अभी बाक़ी है | न तू  है मेरे पास,  पर तेरी मुलाकात की बातें याद है | तू नफ़रत की कर चाहे मुझसे, चाहत तेरे दिल में मेरे लिए, अब भी बाक़ी है | हितेश 

ख़ुद की तलाश

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आज बड़े लम्बे अरसे बाद ! ख़ुद को ख़ुद के गले इस कदर लगे हम, कि ख़ुद में ही खो गए ख़ुद हम | फ़िर ख़ुद को ख़ुद में ढूढने लगे हम, खुदा की कसम ! ख़ुद को ही नही खोज पाए ख़ुद में हम |  ख़ुद को खोजा तो पाया, ख़ुद के ही हो लिए ख़ुद हम | ✍️तेश 

वो पल फ़िर से चाहता हूँ (woh pal fir se chahta hun)

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वो पल फ़िर से चाहता हूँ  (woh pal fir se chahta hun) बिखरने लगा हूँ फ़िर से संभलना चाहता हूँ , जिंदगी के कुछ पल फ़िर से जीना चाहता हूँ | वो सभी सुकूं के पल मै फ़िर से चाहता हूँ , ए यार तेरी जिंदगी के कुछ हसीं पल मै फ़िर से चाहता हूँ | वो सब तेरी बातें तुझसे किए वादे मै फ़िर से चाहता हूँ चाहे सब झूठे ही सही मगर आज उन्हें फिर भी चाहता हूँ | वो तेरा प्यार तेरा एतवार झूठा या सच्चा ही सही फ़िर से चाहता हूँ, कुछ ख़ुशी के पल जिंदगी के मै फ़िर से चाहता हूँ | बिखरने लगा  हूँ फ़िर से संभलना चाहता हूँ, जिंदगी के कुछ पल फ़िर से जीना चाहता हूँ | हितेश

साजिशें (Sajishe)

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साजिशें (Sajishe) मग़रूर थे हम ज़िन्दगी के सफ़र में, पर साज़िशें उनकी हमें रोकने की थी। मोहोब्बत कर रहे थे ज़माने से हम, पर साज़िशें उनकी हमसे नफ़रत कराने की थी। मुस्कुराने में मग़रूर थे हम, पर साज़िशें उनकी हमें रूलाने की थी। मंजिल-ए-इश्क़ पाना चाहते थे हम, पर साज़िशें उनकी हमें नाक़ाम करने की थी। हमें पूरी दुनियां को पा जाने की ख्वाहिश थी , पर साज़िशें उनकी मुझे पा लेने की थी। हितेश

वो ना समझ ....

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ना जाने वो कहा मुझे ढूंढ रहे थे पूरे जहां में ,  उस नासमझ ने अपने दिल मे झाँक के एक बार देखा तक नही। ना जाने क्या चाहिए था उन्हें जमाने से , उस नासमझ ने मुझसे एक बार कुछ कहा तक नहीं । यूँ तो जीत लेते है वो हर एक जंग ज़िन्दगी से, वो नासमझ  दिल के मामले में संभले तक नहीं। ना जाने कहाँ कहाँ घूम आये थे दुनिया मे, वो नासमझ जहाँ सुकून मिला वहाँ  रुके तक नहीं। मंज़िल उनके कदमों में ही थी, पर उस नासमझ ने कदमों में देखा तक नहीं। हितेश

वो शख्स (who shaks)

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वो शख्स (who shaks) एक शख्स मुझमें बस गया कुछ इस कदर, जिस्म में रूह बस गई हो जिस कदर | हर सवाल हर जवाब में उनका जिकर, हर ख़्वाब हर ख़याल में उनका रह बसर, दिन रात हर घड़ी उसका नशा इस कदर, मेरी जिस्म में मेरी रूह है जिस कदर | तड़पता है हर घड़ी मिलने के लिए  इस तरह, दिल के बिना धड़कन हो जिस कदर | हर एक लफ़्ज में उसका नाम आता है इस कदर, चाँद के बिना चांदनी हो जिस कदर | ✍️तेश

उम्मीद ......

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आज फ़िर से झुका आये सजदे में उसके सर, बस इसी उम्मीद में कि कभी तो दुआ क़ुबूल होगी| आज हम फ़िर छोड़ आए मैख़ाने को पीछे, बस इसी उम्मीद में कि वो अपनी नज़रों से पिलायेंगे | आज हम फ़िर से छोड़ आए जमाने को पीछे, बस इसी उम्मीद में कि अपनी एक नई दुनिया बसाएँगे | आज हम फ़िर से छोड़ आए महफ़िल को पीछे , बस इसी उम्मीद में कि महफ़िल आज अपनी सजायेंगे | आज फ़िर से  छोड़ आए शहरअपना पीछे, बस इसी उम्मीद में कि आज  गाँव अपना फ़िर से बसाएँगे | आज फ़िर से ठुकरा आए प्यार जमाने का पीछे, बस इसी उम्मीद में कि उनका प्यार कभी तो होगा हमारे लिए | ✍️ तेश

अधूरी हसरत (adoori hasrat)

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अधूरी हसरत (adoori hasrat) उसकी दीदार की हसरत अधूरी ही रह गयी, जो हर पल मेरा होने का दावा करती थी । सब के लिए तो वो मंजिल थी, पर मेरे लिए वो ख्व़ाब बन कर रह गयी । ना पा सका कभी मैं  उसे लोगों की तरह । मेरी जिंदगी की वो अधूरी  मंजिल हि  बन कर रह गयी । ✍️तेश 

शौक है मुझे (shauk hai mujhe)

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शौक है मुझे (shauk hai mujhe) यूँ तो अकेलापन रास नहीं मुझे, पर हाँ ! ख़ुद से गुफ़्तगू करने का शौक हैं मुझे | यूँ तो अश्क बहाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी यांदों में आँखे नम कर लेने का शौक हैं  मुझे | यूँ तो ज्यादा बातें करना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसके किस्से कहानियाँ लोगो को सुनाने का शौक हैं मुझे | यूँ तो ख़ुदा के दर पर जाके सजदे करना पसंद नहीं मुझे,  पर हाँ!  हर रोज उसके लिए दुआएं करने का शौक है मुझे | यूँ तो महफ़िल में जाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी बज़्म में हर दिन जाने का शौक है मुझे| यूँ तो मयखाने जाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी नज़रो के जाम पीने का शौक है मुझे | यूँ तो इत्र की खुश्बू पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी धीमी सी महक में रहने का शौक है मुझे | यूँ तो किसी से मोहब्बत करने का इरादा नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी मोहब्बत पा जाने की तमन्ना है मुझे | यूँ तो हर किसी से मिलना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ !  उससे हर पल मिलने की तमन्ना हैं मुझे | वो मुझे मिले या ना ...