वो ना समझ ....
उस नासमझ ने अपने दिल मे झाँक के एक बार देखा तक नही।
ना जाने क्या चाहिए था उन्हें जमाने से ,
उस नासमझ ने मुझसे एक बार कुछ कहा तक नहीं ।
यूँ तो जीत लेते है वो हर एक जंग ज़िन्दगी से,
वो नासमझ दिल के मामले में संभले तक नहीं।
ना जाने कहाँ कहाँ घूम आये थे दुनिया मे,
वो नासमझ जहाँ सुकून मिला वहाँ रुके तक नहीं।
मंज़िल उनके कदमों में ही थी,
पर उस नासमझ ने कदमों में देखा तक नहीं।
हितेश

wo nasamajh tumko bhi na smjhe
ReplyDeletethanks vip ji
DeleteSuper 🌟
ReplyDeleteMst
ReplyDeleteThanks 😊
DeleteAmazing👍
ReplyDeleteThanks 🙏
ReplyDeleteAmazing 😍
ReplyDeleteThanks piku ji 😍
ReplyDeleteThanks dear
ReplyDeletelast line......wow
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