अधूरी हसरत (adoori hasrat)

अधूरी हसरत (adoori hasrat)


उसकी दीदार की हसरत अधूरी ही रह गयी,
जो हर पल मेरा होने का दावा करती थी ।

सब के लिए तो वो मंजिल थी,
पर मेरे लिए वो ख्व़ाब बन कर रह गयी ।

ना पा सका कभी मैं  उसे लोगों की तरह ।
मेरी जिंदगी की वो अधूरी  मंजिल हि  बन कर रह गयी ।

✍️तेश 

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