कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani)
कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani)
मुझे क्या चाहिए ?
क्या दोगे तुम?
क्या दे सकते हो ?
छोड़ो! तुम क्या दोगे ?
मैं मांग भी किससे रहा हूँ?
वैसे मैंनेे तो तुमसे कभी कुछ नही मांगा,
आज मांग रहा हूँ,
क्या मेरी बात मानोगे?
क्या मुझे नही जलाओगे?
क्या मुझे बेवज़ह नही मारोगे?
क्या मेरे छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करोगे?
मेरी जरूरत तो हमेशा ही तुझे ही पड़ती है, कभी तुझे फ़ल चाहिए, कभी फूल, कभी पत्ते और कभी लकड़ी सब मुझ से ही मिलता है तुझे, इतना तो मैं देता हूँ, सबसे बड़ी चीज़ जो तुझे जो ज़िंदा रखती है हवा में भी मैं ही तुझे देता हूँ।
क्या कभी सोचा है मुझे काटने से या मरे फ़ल -फूल तोड़ने से पहले , की मेरी कितनी वर्षों की मेहनत है, जिसे चंद मिनटों में तुम बर्बाद कर देते हो।
मुझे क्या बर्बाद करोगे जब अहसास होगा तुझे तो पता चलेगा, की कौन बर्बाद हो गया ।
सही कहते है ना मुफ़्त की चीज़ों की कोई कीमत नही होती।
तभी मेरी भी कोई कीमत नही है।
इतना मुफ्त में देने के बाद भी फिर भी चैन नही तुझे,
अरे ! तुझे तो ज़रूरत पड़ती ही रहती है ना आगे भी पड़ेगी, तो ऐसा कर ना मुझे तू काट लेना मगर मेरे बच्चों को तो रहने दे, ख़ामख़ा वो तेरे किसी काम के भी नही तू उन्हें तो बक्स दे, तुझे ही और जरूरत होगी, तेरे बच्चो को होगी, तब फिर क्या करेगा तू।
कभी आग में झुलस जाता हूँ, कभी आँधी में टूट जाता हूँ, जो चाहे जैसे मर्जी सब अपनी तरह मुझमे बरसते है, मेने तो कभी तुम से ना कुछ मांगा न कुछ कहा, न मेने कुछ देने से मना किया, जब तुम्हे ज़रूरत होती तब तुम मेरे पास आते हो, फ़ूल होते है तो फूलों को तुम ले जाते, फल होते उन्हें भी तुम ले जाते और चले जाते, बस इंसान की हक़ीक़त यही है, जरूरत के हिसाब से ही उपयोग करते है, फ़िर अगले ही पल तुम्हे छोड़ जाते है।
कभी सोचा है मैं अकेले कैसे महसूस करता हूँ अपने हिस्से (फ़ूल, फ़ल, लकड़ी) जब मुझसे दूर कर के ले जाते हो और अकेला कर जाते हो, कभी सोच ही नही सकते । मेरे दर्द को कैसे समझोगे तुम और समझ भी नही सकते, जब तुम अपनों को नही समझ सकते तो फ़िर मैं तो तेरा कोई नही बस ज़रूरत ही हूँ।
कभी आओ मेरे संग बैठो मैं तुम्हे कभी नाराज़ नही करूँगा, मैं तुम्हे ख़ुश करने के लिए तुम्हे ठंडी ताज़ी हवा दूंगा, तुम्हे खाने के लिए फ़ल दूंगा, तुम्हे घर बनाने को पत्ते लकड़ी दूंगा, पर कभी मेरी वेदनाओं को तो समझो । तब तुम्हे समझ आएगा की मैं कैसे रहता हूँ दिन-रात, छाँव-धूप, तूफानों में, एक जगह बस हमेशा खड़ा हुआ।
कभी गले लगा के देखो एक सच्चा साथी ना बनु तो कहना, कभी कहीं नही जाऊंगा जहाँ हूँ वही रहूंगा। मेरी फ़ितरत में नही है भाग जाना मैं तो जहाँ हूँ, ज़िन्दगी भर यही पे हूँ।
कभी समझो मेरे को क़रीब से कभी छुओं मुझे भी प्यार से,
कभी लगाओ मुझे गले से,
मुझे भी प्यार चाहिए, मुझे भी साथी चाहिए।।
"कभी मेरे पास आ के गले तो लगाओ,
मैं एक सच्चा साथी बनूँगा कभी साथी तो बनाओ।"

👌👌
ReplyDeleteThanks MOTO
DeleteNyc Lines 👌👍
ReplyDelete❤❤❤
DeleteReally heart teaching lines 👌
Deletethanks bhai
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