जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq)

जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq)


बेनाम मोहब्बत का जाम पीना अभी बाकी है,
उस शख़्स को सीने से लगाना अभी बाकी है ।

दर -बदर भटकते रहे जिसके लिए हम,
उसको क़रीब से निहारना अभी बाकी है ।

प्यार का अंदाज़ क्या होता है,
उस शख़्स से सीखना अभी बाकी है।

कोई नही है हम दोनों के दरमियां,
उसको अभी ये बताना बाकी है ।

रातों को दिन कर दिया जिसने मेरी,
उसके साथ एक शाम गुजारना बाकी है ।

तड़पता है दिल जिसके लिए हर दफ़ा,
उसको सीने से लगाना अभी बाकी है ।

जिन लबों से सुने थे किस्से मोहब्बत के ,
उन लबों को छूना अभी बाकी है 

मुद्दतों से चाह जिसको पा लेने की थी,
उस शख़्स को पाना अभी बाकी है,

कदम-कदम चलना सिखाया जिसने हमे,
उसके साथ ज़िन्दगी का सफर तय करना अभी बाकी है।

हर पल हँसना सिखाया जिसने हमे,
उसके गले लिपटकर रोना अभी बाकी है,

हर पल ज़िन्दगी जीना सिखाया जिसने हमें,
उसके साथ मरना अभी बाकी है|
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