साजिशें (Sajishe)
साजिशें (Sajishe)
मग़रूर थे हम ज़िन्दगी के सफ़र में,
पर साज़िशें उनकी हमें रोकने की थी।
मोहोब्बत कर रहे थे ज़माने से हम,
पर साज़िशें उनकी हमसे नफ़रत कराने की थी।
मुस्कुराने में मग़रूर थे हम,
पर साज़िशें उनकी हमें रूलाने की थी।
मंजिल-ए-इश्क़ पाना चाहते थे हम,
पर साज़िशें उनकी हमें नाक़ाम करने की थी।
हमें पूरी दुनियां को पा जाने की ख्वाहिश थी ,
पर साज़िशें उनकी मुझे पा लेने की थी।
हितेश

Nice
ReplyDeletewah kya baat h hts...
Deletethasnks dear
DeleteSir ji to good
ReplyDeletethanks dear
DeleteToo gud👍
ReplyDeletethanks dear
DeleteNice
ReplyDeletethanks dear
Deletethanks dear
ReplyDeletethanks dear
ReplyDeleteBahut khoooob
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