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Showing posts from June, 2020

कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani)

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कहानी पेड़ की ज़ुबानी (kahaani ped ki jubani) मुझे क्या चाहिए ?  क्या दोगे तुम? क्या दे सकते हो ? छोड़ो! तुम क्या दोगे ? मैं मांग भी किससे रहा हूँ? वैसे मैंनेे तो तुमसे कभी कुछ नही मांगा, आज मांग रहा हूँ, क्या मेरी बात मानोगे? क्या मुझे नही जलाओगे?  क्या मुझे बेवज़ह नही मारोगे? क्या मेरे छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करोगे? मेरी जरूरत तो हमेशा ही तुझे ही पड़ती है, कभी तुझे फ़ल चाहिए, कभी फूल, कभी पत्ते और कभी लकड़ी सब मुझ से ही मिलता है तुझे, इतना तो मैं देता हूँ, सबसे बड़ी चीज़ जो तुझे जो ज़िंदा रखती है हवा में भी मैं ही तुझे देता हूँ। क्या कभी सोचा है मुझे काटने से या मरे फ़ल -फूल तोड़ने से पहले , की मेरी कितनी वर्षों की मेहनत है, जिसे चंद मिनटों में तुम बर्बाद कर देते हो। मुझे क्या बर्बाद करोगे जब अहसास होगा तुझे तो पता चलेगा, की कौन बर्बाद हो गया । सही कहते है ना मुफ़्त की चीज़ों की कोई कीमत नही होती। तभी मेरी भी कोई कीमत नही है। इतना मुफ्त में देने के बाद भी फिर भी चैन नही तुझे, अरे ! तुझे तो ज़रूरत पड़ती ही रहती है ना आगे भी पड़ेगी, तो ऐसा कर ना म...

एक यार है मेरा (ek yaar hai mera)

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एक यार है मेरा (ek yaar hai mera) अंधेरे में एक चिराग़ सा, चेहरे में आफ़ताब सा, एक यार है मेरा । गुलशन में बहार सा, फ़ूलो में महक सा , एक यार है मेरा। थोड़ा सा मासूम सा, थोड़ा सा शरारती सा, एक यार है मेरा। जो हर एक पल को जीता सा, हर किसी को जीना सिखाता सा , एक यार है मेरा। हर किसी का वो अपना सा, हर किसी के दर्द में दवा सा, एक यार है मेरा। दर्द में हमसफ़र सा, ज़ख्म में मरहम सा, एक यार है मेरा। बेगानों में अपना सा, जिससे रिस्ता एक गहरा सा, एक यार है मेरा। पूर्णिमा के चाँद सा, अमावस में दिए सा, एक यार है मेरा। पतझड़ में बहार सा, बसंत में बहार सा, एक यार है मेरा। ना उम्मीदी में उम्मीद सा, काली रात में जुगनू सा, एक यार है मेरा। प्यार के जज्बात सा, इश्क़ के एहसास सा, एक यार है मेरा। सर्दियों की धूप सा, गर्मी में छाँव सा, एक यार है मेरा। मंदिर की पूजा  सा, मस्जिद की इबादत सा, एक यार है मेरा। कुछ मेरा सा, कुछ अपने सा, एक यार है मेरा ।। ************* हितेश *************

जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq)

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जाम-ए-इश्क़ (jaam-e-ishq) बेनाम मोहब्बत का जाम पीना अभी बाकी है, उस शख़्स को सीने से लगाना अभी बाकी है । दर -बदर भटकते रहे जिसके लिए हम, उसको क़रीब से निहारना अभी बाकी है । प्यार का अंदाज़ क्या होता है, उस शख़्स से सीखना अभी बाकी है। कोई नही है हम दोनों के दरमियां, उसको अभी ये बताना बाकी है । रातों को दिन कर दिया जिसने मेरी, उसके साथ एक शाम गुजारना बाकी है । तड़पता है दिल जिसके लिए हर दफ़ा, उसको सीने से लगाना अभी बाकी है । जिन लबों से सुने थे किस्से मोहब्बत के , उन लबों को छूना अभी बाकी है  मुद्दतों से चाह जिसको पा लेने की थी, उस शख़्स को पाना अभी बाकी है, कदम-कदम चलना सिखाया जिसने हमे, उसके साथ ज़िन्दगी का सफर तय करना अभी बाकी है। हर पल हँसना सिखाया जिसने हमे, उसके गले लिपटकर रोना अभी बाकी है, हर पल ज़िन्दगी जीना सिखाया जिसने हमें, उसके साथ मरना अभी बाकी है| ************************************* ************************************* for more visit on:-