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Showing posts from April, 2020

साजिशें (Sajishe)

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साजिशें (Sajishe) मग़रूर थे हम ज़िन्दगी के सफ़र में, पर साज़िशें उनकी हमें रोकने की थी। मोहोब्बत कर रहे थे ज़माने से हम, पर साज़िशें उनकी हमसे नफ़रत कराने की थी। मुस्कुराने में मग़रूर थे हम, पर साज़िशें उनकी हमें रूलाने की थी। मंजिल-ए-इश्क़ पाना चाहते थे हम, पर साज़िशें उनकी हमें नाक़ाम करने की थी। हमें पूरी दुनियां को पा जाने की ख्वाहिश थी , पर साज़िशें उनकी मुझे पा लेने की थी। हितेश

वो ना समझ ....

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ना जाने वो कहा मुझे ढूंढ रहे थे पूरे जहां में ,  उस नासमझ ने अपने दिल मे झाँक के एक बार देखा तक नही। ना जाने क्या चाहिए था उन्हें जमाने से , उस नासमझ ने मुझसे एक बार कुछ कहा तक नहीं । यूँ तो जीत लेते है वो हर एक जंग ज़िन्दगी से, वो नासमझ  दिल के मामले में संभले तक नहीं। ना जाने कहाँ कहाँ घूम आये थे दुनिया मे, वो नासमझ जहाँ सुकून मिला वहाँ  रुके तक नहीं। मंज़िल उनके कदमों में ही थी, पर उस नासमझ ने कदमों में देखा तक नहीं। हितेश

वो शख्स (who shaks)

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वो शख्स (who shaks) एक शख्स मुझमें बस गया कुछ इस कदर, जिस्म में रूह बस गई हो जिस कदर | हर सवाल हर जवाब में उनका जिकर, हर ख़्वाब हर ख़याल में उनका रह बसर, दिन रात हर घड़ी उसका नशा इस कदर, मेरी जिस्म में मेरी रूह है जिस कदर | तड़पता है हर घड़ी मिलने के लिए  इस तरह, दिल के बिना धड़कन हो जिस कदर | हर एक लफ़्ज में उसका नाम आता है इस कदर, चाँद के बिना चांदनी हो जिस कदर | ✍️तेश

उम्मीद ......

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आज फ़िर से झुका आये सजदे में उसके सर, बस इसी उम्मीद में कि कभी तो दुआ क़ुबूल होगी| आज हम फ़िर छोड़ आए मैख़ाने को पीछे, बस इसी उम्मीद में कि वो अपनी नज़रों से पिलायेंगे | आज हम फ़िर से छोड़ आए जमाने को पीछे, बस इसी उम्मीद में कि अपनी एक नई दुनिया बसाएँगे | आज हम फ़िर से छोड़ आए महफ़िल को पीछे , बस इसी उम्मीद में कि महफ़िल आज अपनी सजायेंगे | आज फ़िर से  छोड़ आए शहरअपना पीछे, बस इसी उम्मीद में कि आज  गाँव अपना फ़िर से बसाएँगे | आज फ़िर से ठुकरा आए प्यार जमाने का पीछे, बस इसी उम्मीद में कि उनका प्यार कभी तो होगा हमारे लिए | ✍️ तेश

अधूरी हसरत (adoori hasrat)

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अधूरी हसरत (adoori hasrat) उसकी दीदार की हसरत अधूरी ही रह गयी, जो हर पल मेरा होने का दावा करती थी । सब के लिए तो वो मंजिल थी, पर मेरे लिए वो ख्व़ाब बन कर रह गयी । ना पा सका कभी मैं  उसे लोगों की तरह । मेरी जिंदगी की वो अधूरी  मंजिल हि  बन कर रह गयी । ✍️तेश 

शौक है मुझे (shauk hai mujhe)

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शौक है मुझे (shauk hai mujhe) यूँ तो अकेलापन रास नहीं मुझे, पर हाँ ! ख़ुद से गुफ़्तगू करने का शौक हैं मुझे | यूँ तो अश्क बहाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी यांदों में आँखे नम कर लेने का शौक हैं  मुझे | यूँ तो ज्यादा बातें करना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसके किस्से कहानियाँ लोगो को सुनाने का शौक हैं मुझे | यूँ तो ख़ुदा के दर पर जाके सजदे करना पसंद नहीं मुझे,  पर हाँ!  हर रोज उसके लिए दुआएं करने का शौक है मुझे | यूँ तो महफ़िल में जाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी बज़्म में हर दिन जाने का शौक है मुझे| यूँ तो मयखाने जाना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी नज़रो के जाम पीने का शौक है मुझे | यूँ तो इत्र की खुश्बू पसंद नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी धीमी सी महक में रहने का शौक है मुझे | यूँ तो किसी से मोहब्बत करने का इरादा नहीं मुझे, पर हाँ ! उसकी मोहब्बत पा जाने की तमन्ना है मुझे | यूँ तो हर किसी से मिलना पसंद नहीं मुझे, पर हाँ !  उससे हर पल मिलने की तमन्ना हैं मुझे | वो मुझे मिले या ना ...